बहू नौकरानी नहीं
पति ने माँगा तलाक़: 'बीवी खाना नहीं बनाती'
क्या हुआ था
फ़रवरी 2002 में शादी हुई। पति चार्टर्ड अकाउंटेंट है। जुलाई 2002 में पत्नी ससुराल छोड़कर चली गई, यानी दोनों कुछ ही महीने साथ रहे।
2004 में पति ने क्रूरता के आधार पर तलाक़ माँगा। उसके आरोप थे कि पत्नी ठीक से खाना नहीं बना पाती, उसका टिफ़िन नहीं बनाती, सास-ससुर की बात नहीं मानती, बड़ों की इज़्ज़त नहीं करती और बार-बार मायके जाती है।
पत्नी ने इन आरोपों से इनकार किया और ससुराल वालों पर परेशान करने का आरोप लगाया। उसने गुज़ारा भत्ते की अर्ज़ी भी दी।
जुलाई 2010 में मुंबई की फ़ैमिली कोर्ट ने पति को तलाक़ दे दिया और पत्नी की गुज़ारे की अर्ज़ी ख़ारिज कर दी। पत्नी ने हाई कोर्ट में अपील की।
दोनों पक्ष
आप जज होते तो?
नीचे फ़ैसला पढ़ने से पहले एक बार सोचिए। फिर रील के कमेंट में बताइए कि अदालत सही थी या ग़लत।
Instagram पर रील देखें8 मई 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने फ़ैमिली कोर्ट का फ़ैसला रद्द कर दिया और पति की तलाक़ की अर्ज़ी ख़ारिज कर दी। अदालत ने कहा कि सिर्फ़ खाना बनाने या सफ़ाई जैसे घर के काम न करना अपने-आप क्रूरता नहीं है। दोनों बहुत कम समय साथ रहे थे, और आरोप शादी की शुरुआती खटपट जैसे थे। पति को पत्नी को हर महीने ₹10,000 गुज़ारा भत्ता और ₹10,000 रहने के इंतज़ाम के लिए देने होंगे, अर्ज़ी की तारीख़ से।
“marriage is a partnership of equals and not a service contract and the wife's are not "deemed maids"”
Bombay High Court
इस केस से क्या सीखें
इस केस में अदालत ने कहा कि क्रूरता के लिए लंबे समय तक चलने वाला गंभीर बर्ताव चाहिए। घर के काम को लेकर शुरुआती झगड़े अपने-आप तलाक़ का आधार नहीं बनते।
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- अदालत
- बॉम्बे हाई कोर्ट
- केस
- X v. Y, 2026 LiveLaw (Bom) 262
- बेंच
- जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे
- फ़ैसला
- मई 2026
- स्रोत
- LiveLaw
यह पेज केस की सार्वजनिक रिपोर्ट पर आधारित है और सिर्फ़ जानकारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं। हर मामला अलग होता है; अपने मामले के लिए वकील या लीगल एड से बात करें। कोई ग़लती दिखे तो हमें बताएँ, हम ठीक करेंगे।