केस 2 · स्त्रीधन

गहने किसके?

डिलीवरी के बाद बहू लौटी... दरवाज़ा बंद था

क्या हुआ था

दिसंबर 2014 में शादी हुई। बहू संयुक्त परिवार में रहने लगी और मायके से मिले उसके गहने सास ने अपने पास रख लिए।

वह डिलीवरी के लिए मायके गई। नवजात बच्चे के साथ लौटी तो उसे घर में घुसने नहीं दिया गया, और पति ने बच्चे के पिता होने पर ही सवाल उठा दिया।

पति का कहना था कि गहने तो पत्नी ख़ुद लेकर गई थी।

फ़ैमिली कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर तलाक़ तो दे दिया, लेकिन गहने वापस दिलाने से मना कर दिया।

दोनों पक्ष

बहूगहने मेरे मायके के हैं, मेरा स्त्रीधन हैं। मुझे लौटाए जाएँ।
पति और ससुरालगहने वह ख़ुद ले गई थी।

आप जज होते तो?

नीचे फ़ैसला पढ़ने से पहले एक बार सोचिए। फिर रील के कमेंट में बताइए कि अदालत सही थी या ग़लत।

Instagram पर रील देखें
अदालत का फ़ैसला

हाई कोर्ट ने गहने न लौटाने वाला हिस्सा पलट दिया। स्त्रीधन पत्नी की अपनी संपत्ति है, संयुक्त परिवार की नहीं। पति को चार हफ़्ते में सारे गहने और सामान लौटाने होंगे, वरना उनकी आज की क़ीमत 7.5% सालाना ब्याज के साथ देनी होगी।

“It is the only reminder of her life in her parents' house.”
Madras High Court

इस केस से क्या सीखें

शादी में मिले गहनों की लिस्ट, फ़ोटो और रसीदें सँभालकर रखें। विवाद होने पर यही सबसे काम आते हैं।

इस केस से जुड़ी मुफ़्त चेकलिस्ट

शादी के गहनों और सामान की पूरी लिस्ट एक पन्ने में।

चेकलिस्ट डाउनलोड करें

रोज़ एक असली केस

हर दिन एक नया फ़ैसला, आसान हिंदी में। WhatsApp चैनल जल्द आ रहा है; तब तक YouTube या Instagram पर जुड़िए।

अदालत
मद्रास हाई कोर्ट
केस
V v. S, 2026:MHC:2431
बेंच
जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस के. राजशेखर
फ़ैसला
जुलाई 2026
स्रोत
Verdictum

यह पेज केस की सार्वजनिक रिपोर्ट पर आधारित है और सिर्फ़ जानकारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं। हर मामला अलग होता है; अपने मामले के लिए वकील या लीगल एड से बात करें। कोई ग़लती दिखे तो हमें बताएँ, हम ठीक करेंगे।