हर ख़र्च का हिसाब
आरोप: पति माँगता था पाई-पाई का हिसाब
क्या हुआ था
दिसंबर 2016 में शादी हुई, और दोनों अमेरिका (मिशिगन) में रहने लगे। दोनों सॉफ़्टवेयर इंजीनियर थे।
अगस्त 2019 में बीवी बेटे के साथ भारत लौट आई और हैदराबाद में अपने मायके में रहने लगी।
जनवरी 2022 में पति ने क़ानूनी नोटिस भेजकर उसे अमेरिका लौटने को कहा। तेरह दिन बाद बीवी ने पति के ख़िलाफ़ शिकायत दी, जिस पर क्रूरता (IPC धारा 498A) की FIR दर्ज हुई।
बीवी के आरोप थे कि पति अपने माँ-बाप को लाखों भेजता था पर उससे पाई-पाई का हिसाब माँगता था, ख़र्चों की एक्सेल शीट रखवाता था, शादी के बाद नौकरी छुड़वाई और डिलीवरी के बाद वज़न को लेकर ताने दिए। अप्रैल 2023 में तेलंगाना हाई कोर्ट ने केस रद्द करने से मना कर दिया, और पति सुप्रीम कोर्ट गया।
दोनों पक्ष
आप जज होते तो?
नीचे फ़ैसला पढ़ने से पहले एक बार सोचिए। फिर रील के कमेंट में बताइए कि अदालत सही थी या ग़लत।
Instagram प्रोफ़ाइल देखें19 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये आरोप, अगर जैसे के तैसे मान भी लिए जाएँ, तो शादी की रोज़ की खटपट दिखाते हैं, क्रूरता नहीं। घरवालों को पैसे भेजना आपराधिक मुक़दमे का आधार नहीं बन सकता। पति के ख़िलाफ़ FIR और उससे जुड़ी कार्यवाही रद्द कर दी गई।
“they reflect the daily wear and tear of marriage and can, in no way, be categorised as cruelty.”
Supreme Court of India
इस केस से क्या सीखें
इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शादी में पैसे को लेकर रोज़ की खटपट, अपने आप में, आपराधिक क्रूरता नहीं बनती।
रोज़ एक असली केस
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- अदालत
- सुप्रीम कोर्ट
- केस
- XXXX v. State of Telangana & Anr., 2025 INSC 1471
- बेंच
- जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन
- फ़ैसला
- दिसंबर 2025
- स्रोत
- LiveLaw
यह पेज केस की सार्वजनिक रिपोर्ट पर आधारित है और सिर्फ़ जानकारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं। हर मामला अलग होता है; अपने मामले के लिए वकील या लीगल एड से बात करें। कोई ग़लती दिखे तो हमें बताएँ, हम ठीक करेंगे।