केस 5 · विधवा बहू और ससुराल

पति गया, हक़ भी गया?

आरोप: सास-ससुर ने विधवा बहू को निकाला

क्या हुआ था

दिसंबर 2012 में शादी हुई। फ़रवरी 2022 में पति की मौत हो गई।

विधवा बहू का आरोप है कि उसे परेशान किया गया और सास-ससुर ने उसे ससुराल से निकाल दिया। उसने कहा कि उसकी अपनी कोई कमाई नहीं है।

2022 में उसने फ़ैमिली कोर्ट में सास-ससुर के ख़िलाफ़ गुज़ारा भत्ते की अर्ज़ी दी: हर महीने ₹1 लाख, और ₹1 करोड़ स्थायी गुज़ारा भत्ता।

सास-ससुर ने यह केस रद्द करवाने के लिए हाई कोर्ट में अर्ज़ी दी। हाई कोर्ट में मामला चलते समय ससुर की मौत हो गई, और कार्यवाही सिर्फ़ सास के ख़िलाफ़ रह गई।

दोनों पक्ष

बहूपति के जाने के बाद मेरी कोई कमाई नहीं है। सास-ससुर को मेरा गुज़ारा देना चाहिए।
सासधारा 125 में सास से गुज़ारा भत्ता माँगने का कोई प्रावधान ही नहीं है।

आप जज होते तो?

नीचे फ़ैसला पढ़ने से पहले एक बार सोचिए। फिर रील के कमेंट में बताइए कि अदालत सही थी या ग़लत।

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अदालत का फ़ैसला

3 सितंबर 2026 को तेलंगाना हाई कोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 125 सास पर विधवा बहू का गुज़ारा देने की कोई क़ानूनी ज़िम्मेदारी नहीं डालती, और ससुर की मौत से भी यह ज़िम्मेदारी सास पर नहीं आ जाती। फ़ैमिली कोर्ट की कार्यवाही सास के लिए रद्द कर दी गई। अदालत ने यह भी कहा कि इससे बहू के लिए क़ानून के दूसरे रास्ते बंद नहीं होते।

“The provision does not create any statutory liability upon a mother-in-law to maintain her widowed daughter-in-law…”
Telangana High Court

इस केस से क्या सीखें

इस केस में अदालत ने कहा कि धारा 125 के तहत सास से विधवा बहू का गुज़ारा नहीं माँगा जा सकता, पर बहू के दूसरे क़ानूनी दावे इससे ख़त्म नहीं होते।

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अदालत
तेलंगाना हाई कोर्ट
केस
Peravali (Janapatla) Surya Kumari v. State of Telangana & Ors., Criminal Petition No. 7097 of 2024
बेंच
जस्टिस एन. तुकारामजी
फ़ैसला
सितंबर 2026
स्रोत
LiveLaw

यह पेज केस की सार्वजनिक रिपोर्ट पर आधारित है और सिर्फ़ जानकारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं। हर मामला अलग होता है; अपने मामले के लिए वकील या लीगल एड से बात करें। कोई ग़लती दिखे तो हमें बताएँ, हम ठीक करेंगे।