केस 7 · बच्चे और कस्टडी

पोता किसका?

आदेश: ढाई साल का बच्चा हर गुरुवार हाज़िर

क्या हुआ था

पति की मौत के बाद बहू ने दूसरी शादी कर ली और बेटे को साथ लेकर दूसरे ससुराल चली गई। दादा के वकील के मुताबिक़ यह शादी पति की मौत का एक साल पूरा होने से पहले हुई। 2025 में फ़ैमिली कोर्ट के आदेश के समय बच्चा ढाई साल का था।

बच्चे के दादा ने 2025 में फ़ैमिली कोर्ट में पोते की स्थायी कस्टडी के लिए अर्ज़ी दी। उनका कहना था कि बहू बिना उनकी मर्ज़ी के बच्चे को ले गई और उन्हें बच्चे से पूरी तरह काट दिया गया।

11 सितंबर 2025 को फ़ैमिली कोर्ट ने अंतरिम आदेश दिया: माँ हर कामकाजी गुरुवार को बच्चे के साथ कोर्ट में हाज़िर रहे, ताकि सुबह 11 से शाम 5 बजे तक दादा-दादी कोर्ट परिसर में ही उससे मिल सकें; मिलने के दौरान माँ के दूसरे पति साथ नहीं रहेंगे।

माँ ने इस आदेश को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी।

दोनों पक्ष

दादाबेटे को गए साल भी नहीं हुआ और बहू ने दूसरी शादी कर ली, पोते को बिना मेरी मर्ज़ी के ले गई। मुझे मेरे पोते से मिलने तक नहीं दिया जाता।
माँमेरा बेटा ढाई साल का है और मेरी गोद नहीं छोड़ता। दादा के जिस बयान (पर्सिस) पर यह आदेश हुआ, उसमें उन्होंने कोई माँग की ही नहीं थी, फिर भी उसे हर गुरुवार छह घंटे कोर्ट में रखने का आदेश बच्चे की भलाई के ख़िलाफ़ है।

आप जज होते तो?

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अदालत का फ़ैसला

23 मार्च 2026 को गुजरात हाई कोर्ट ने कहा कि ढाई साल के बच्चे और माँ को हर गुरुवार कोर्ट आने पर मजबूर करना, दादा-दादी से मिलवाने के नाम पर, ग़ैरज़रूरी और अन्यायपूर्ण है, और कहा कि फ़ैमिली कोर्ट का नज़रिया समझ से परे है, ढाई साल का बच्चा 'अमानवीय रवैये' का शिकार बन गया। 11 सितंबर 2025 का गुरुवार वाला आदेश रद्द कर दिया गया। दादा की कस्टडी अर्ज़ी पर फ़ैसला इस आदेश में नहीं हुआ।

“Such order forcing the petitioner mother and the minor to visit court premises on every Thursday under the guise of access to grandparents is uncalled for and unjust.”
High Court of Gujarat

इस केस से क्या सीखें

इस केस में हाई कोर्ट ने कहा कि कस्टडी के मामलों में बच्चे की भलाई, लड़ रहे पक्षों के दावों से ऊपर रखनी होगी, और इसी आधार पर दादा-दादी की मुलाक़ात वाला गुरुवार का आदेश रद्द किया।

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अदालत
गुजरात हाई कोर्ट
केस
XXXX v. XXXX, R/Special Civil Application No. 15369 of 2025, 2026:GUJHC:22011
बेंच
जस्टिस जे.सी. दोशी
फ़ैसला
मार्च 2026
स्रोत
Verdictum

यह पेज केस की सार्वजनिक रिपोर्ट पर आधारित है और सिर्फ़ जानकारी के लिए है, क़ानूनी सलाह नहीं। हर मामला अलग होता है; अपने मामले के लिए वकील या लीगल एड से बात करें। कोई ग़लती दिखे तो हमें बताएँ, हम ठीक करेंगे।